कानपुर देहात सामूहिक नरसंहार में 44 साल बाद मिला न्याय,5 आरोपियों को उम्रकैद
21आरोपियों ने 44 साल पहले किया था सामूहिक नरसंहार
14 आरोपियों हो चुकी मौत ,1 ने लगाई थी फांसी, 5 आरोपियों को मिली उम्रकैद
कानपुर देहात में एडीजे 4 ने हत्या के मामले में 5 लोगो को उम्र कैद की सज़ा सुना दी दरअसल सन 1979 में बदला लेने के उद्देश्य से 21 लोगो ने घर मे घुसकर एक ही परिवार के 4 लोगो की निर्मम हत्या कर दी थी मामला 44 सालों न्यायालय में चल रहा था 14 मुल्जिमान की मौत हो चुकी थी एक मुल्ज़िम ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी और एक मुल्ज़िम साक्ष्य के अभाव में निकल गए थी बाकी 5 लोगो को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है
सन 1979 मैं कानपुर देहात के सेहलूपुर गांव में एक किसान दिनेश की विभक्त तरीके से हत्या कर दी गई थी और हत्या का आरोप गांव के ही रहने वाले अयोध्या प्रसाद पर लगा था साल भीतर ही अयोध्या प्रसाद की जमानत हो गई थी जमानत पर रिहा होने के बाद मृतक किसान दिनेश के सगे भाई रमेश चंद्र ने अपने भाई की मौत का बदला लेने की ठान ली और अपने 20 साथियों के संग बदला लेने के इरादे से हत्यारे के परिवार के साथ ऐसी खून की होली खेली किस सामूहिक नरसंहार ने पूरे कानपुर देहात को हिला दिया था एक साथ एक ही परिवार के चार सदस्यों की बेरहमी के साथ हत्या कर दी गई जिसमें सूरज शिवप्रसाद छोटे और 4 साल के भीम सिंह को मौत के घाट उतार दिया गया इस नरसंहार में पुलिस ने 21 आरोपियों के खिलाफ सामूहिक नरसंहार को देखते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज कर दिया था।
मौत का ऐसा तांडव जिसे देखने वालों ने देखकर खामोशी अख्तियार कर ली थी और जिसने इस सामूहिक नरसंहार की कहानी को सुना वह हैरत में पड़ गया पुलिस हिरासत में हथकड़ी में कैद कानपुर देहात के न्यायालय परिसर में आते हुए इन आरोपियों को जरा गौर से देखिए इन्होंने मौत की ऐसी इबारत लिखी जिसे पढ़कर कोई भी हैरत में पड़ जाएगा दरअसल 4 लोगों के सामूहिक नरसंहार के मामले में 21 लोगों को आरोपी बनाया गया था जिसका मुकदमा न्यायालय में पिछले 44 सालों से चल रहा है इंसाफ की ऐसी लड़ाई जिसने 44 सालों में नरसंहार करने वाले 21 आरोपियों में से 14 आरोपी सज़ा काटने से पहले ही ऊपर वालों को प्यारे हो गए तो वही कुछ सालों पहले एक आरोपी ने मुकदमे से तंग आकर खुद फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी 44 साल के लंबे समय के अंतराल के चलते सभी आरोपियों की उम्र भी ढलती जा रही थी लेकिन इंसाफ का सफर इतना लंबा था कि उसे तय करने में न्यायालय और वादी को उम्र के आखिरी पड़ाव पर आखिर इंसाफ मिल गया, अदालत में नरसंहार के 21 आरोपियों में से अब 6 आरोपी ही जीवित हाजिर हुए हैं विजय बहादुर, प्रेमचंद ,विजय नारायण ,बडोले ,मथुरा और धनीराम जिसमें से सबूतों के अभाव में न्यायालय ने मथुरा नाम के एक आरोपी को दोषमुक्त करार कर दिया कर दिया साथ ही साथ 5 आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुना कर 29 - 29 हजार रुपए का आर्थिक दंड भी दिया है।
बाइट -- प्रदीप पांडे ( शासकीय अधिवक्ता कानपुर देहात न्यायालय )
वी ओ -- वही शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि यह मामला इतने लंबे समय से चल रहा था और अब 44 सालों के बाद इस मामले में 5 आरोपियों को उम्र कैद की सजा न्यायालय से सुनाई गई है तो वही एक आरोपी मथुरा को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त करार देते हुए रिहा कर दिया गया है।





