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शिष्या से दुष्कर्म के मामले में 12 साल बाद बरी हुये स्वामी चिन्मयानंद

पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री पर 12 साल पहले दर्ज कराया गया था बलात्कार का मुकदमा



पिछले 12 सालों से शिष्या से दुष्कर्म के आरोप में आरोपीपूर्व राज्य मंत्री स्वामी चिन्मय आनंद को अदालत में बाइज्जत बरी कर दिया । न्यायालय एमपी एमएलए कोर्ट शाहजहांपुर में बृहस्पतिवार को अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद को दोष मुक्त कर दिया । स्वामी चिन्मयानंद के अधिवक्ता फिरोज हसन ने बताया ।30 नवंबर 2011 को स्वामी चिन्मयानंद की शिष्या साध्वी चिदर्पिता ने थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी । रिपोर्ट में स्वामी चिन्मयानंद व उनके साथियों के खिलाफ बंधक बनाकर बलात्कार करने का आरोप लगाया गया था।

इस मामले में पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया । इसके बाद मुकदमा अदालत में विचाराधीन था । इस मुकदमे में बचाव पक्ष वा अभियोजन पक्ष के वकीलों की दलीलों को सुनते हुए एमपी एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश एहसान हुसैन ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद निर्णय सुनाते हुए  पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया । स्वामी चिन्मयानंद के अधिवक्ता फिरोज हसन खान ने बताया अभियोजन पक्ष की ओर से कुल छह गवाह पेश किए गए थे । जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता फिरोज हसन खान ने उनसे  जिरह की।  गवाहों से बहस  की प्रतिक्रिया पूरी होने के बाद विशेष लोक अभियोजक श्रीमती नीलिमा सक्सेना ने, तथा बचाव पक्ष की ओर से स्वामी चिन्मयानंद के  अधिवक्ता फिरोज हसन खान व अधिवक्ता मनेंद सिंह ने अपने तर्क व बहस अदालत के सामने पेश किए । इसके बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया । अदालत का निर्णय आने के बाद स्वामी  के अधिवक्ता फिरोज हसन खान ने खुशी का इजहार करते हुए कहा मेरे मुवक्किल  पर साजिशन झूठे आरोप लगाए गए थे । उनका पूरा विश्वास था की अदालत उनको दोष मुक्त करार देगी । पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद को अदालत से बाइज्जत बरी  किए जाने के बादउनके समर्थकों ने खुशी का इजहार किया ।


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