ताजमहल में शिवरात्रि पर जलाभिषेक की मांग को लेकर याचिका दायर ।
योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर ने सिविल जज सीनियर डिवीजन न्यायालय में दायर की याचिका ।
ताजमहल में शिवरात्रि के अवसर पर जलाभिषेक की मांग वाली अनुमति को लेकर सोमवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन न्यायालय में याचिका दायर की गई है याचिका योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर ने अपने अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर एवं अधिवक्ता झम्मन सिंह रघुवंशी द्वारा दायर की है कुंवर अजय तोमर ने ताजमहल को तेजोमहालय शिव मंदिर बताते हुए अपने चार पदाधिकारीयों के साथ शिवरात्रि पर जलाभिषेक करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ASI से कोर्ट के माध्यम से अनुमति मांगी है ।
याचिकाकर्ता कुंवर अजय तोमर ने बताया कि मुगल काल में हजारों मंदिरों को ध्वस्त कर उनके ऊपर मकबरे, मस्जिदें बना दी गई थी । अयोध्या, मथुरा, काशी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है मुगलों ने भारत में शासन के दौरान हिंदू मंदिरों को तोड़कर उन पर अपने नाम की नेम प्लेट लगा दी थी किसी दूसरे के घर पर अपने नाम की नेम प्लेट लगाने से वह खुद का घर नहीं हो जाता है उन्हीं में से ताजमहल है जो पहले तेजोमहालय शिव मंदिर हुआ करता था । संबंधित साक्ष्य अपने अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर एवं अधिवक्ता झम्मन सिंह रघुवंशी के द्वारा कोर्ट में दिए गए हैं कि वह हिंदू मंदिर है इसलिए शिवरात्रि पर जलाभिषेक करने के लिए न्यायालय के माध्यम से ASI से अनुमति मांगी है अनुमति मिलती है तो अपने पदाधिकारी के साथ तेजोमहालय में जलाभिषेक करेंगे । जब ताजमहल में उर्स हो सकता है नमाज हो सकती है तो फिर जलाभिषेक एवं पूजा अर्चना भी होनी चाहिए । वर्तमान में ताजमहल एक पर्यटन स्थल का केंद्र है एक स्मारक है जहां सभी धर्म एवं मजहब के लोग आते हैं देश-विदेश से पर्यटक वहां आते हैं जिस पर किसी एक मजहब की बपौती नहीं चलनी चाहिए ।
याचिकाकर्ता में कुंवर अजय तोमर ने संगठन के पदाधिकारी प्रदेश कोषाध्यक्ष रामरतन तोमर, पूर्व महानगर अध्यक्ष धर्मेंद्र धाकड़, युवा महानगर महामंत्री सुमित भोला, जिला मंत्री भाजपा युवा मोर्चा पदम सिंह के साथ जलाभिषेक करने की मांग की है।
कुंवर अजय तोमर की ओर दायर याचिका में उनके अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर एवं अधिवक्ता झम्मन सिंह रघुवंशी ने बताया है कि वर्ष 1212 में राजा परम द्रविदेव ने शिव मंदिर बनवाया था जिसे तेजोमहालय/ तेजोमहल नाम दिया गया था । ताजमहल का निर्माण 1653 में पूरा हुआ था जबकि औरंगजेब ने अपने पिता शाहजहां को 1652 में ही खत लिखा था कि इमारत में दरारें आ गई है यह कभी भी गिर सकती है इसकी मरम्मत की जाए तो इससे यह भी साफ होता है कि कहीं ना कहीं पुराने ही किसी चिन्ह पर इसको मॉडिफाई किया गया है मुख्य गुम्बद के किरीट पर जो कलश है वह हिन्दू मंदिरों की तरह है आज भी हिन्दू मंदिरों पर स्वर्ण कलश स्थापित करने की परंपरा है कलश पर चंद्रमा बना है। अपने नियोजन के कारण चन्द्रमा एवं कलश की नोक मिलकर एक त्रिशूल का आकार बनाती है जो कि भगवान शिव का चिह्न है । इतिहास में पढ़ाया जाता है कि ताजमहल का निर्माण कार्य 1632 में शुरू और लगभग 1653 में इसका निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। अब सोचिए कि जब मुमताज का निधन 1631 में हुआ तो फिर कैसे उन्हें 1631 में ही ताजमहल में कैसे दफना दिया गया । जबकि ताजमहल तो 1632 में बनना शुरू हुआ था ।
बाहरी दीवारों पर कलश, त्रिशूल, कमल, नारियल और आम के पेड़ की पत्तियों के प्रतीक चिन्ह अंकित है जो कि हिंदू मंदिरों के प्रतीक हुआ करते हैं जिन्हें सनातन धर्म में उपयोग किया जाता है हिन्दू मंदिर प्रायः नदी या समुद्र तट पर बनाए जाते हैं। ताज भी यमुना नदी के तट पर बना है, जो कि शिव मंदिर के लिए एक उपयुक्त स्थान है। वहीं बताया यह भी जाता है कि मुमताज को बुरहानपुर के ताप्ती नदी के किनारे एक बाग में दफनाया गया था ।
पूर्व महानगर अध्यक्ष धर्मेंद्र धाकड़, जिला मंत्री भाजपा युवा मोर्चा पदम सिंह, सुमित भोला, अर्जुन उपाध्याय, हरिओम तोमर, श्यामवीर कश्यप, अमित लालवानी आदि कार्यकर्ता कोर्ट में मौजूद रहे ।





