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मृतक कर रहे मनरेगा में मजदूरी, दहशत में ग्रामीण

 मृतक  ने किया मनरेगा में कार्य 



आप शायद ही विश्वास करे, लेकिन यह 16 आने सच है. कि सिद्धार्थनगर जिले मे कई वर्ष पहले मर चुके लोग मनरेगा योजना के तहत कराये जा रहे कामो को करने के लिए मजदूरी करने आते है, रोजगार सेवक मृतक की काम करने के दौरान की फोटो क्लिक करके सरकारी पोर्टल पर अपलोड करता है और बाकायदा 14 दिनों के काम की हाजिरी भी लगाता है.  जिस दिन मृतक मजदूर काम पर नहीं आया तो अनुपस्थिति भी पोर्टल पर अंकित करता है. यह हम नहीं कह रहे हैँ. बल्कि सरकारी कार्यालय द्वारा जारी किया गया मृतक जगमोहन के मनरेगा कार्ड मे साफ साफ अंकित है. पुरे मामले का खुलासा तब हुआ ज़ब जगमोहन के मरने के साढ़े तीन साल बाद इसी जून मे की गई मजदूरी का पैसा उसके बैक खाते मे आ गया, और उसे निकालने के लिए रोजगार सेवक जगमोहन के घर पहुंच गई और मृत मजदूर की बैंक पासबुक मांगने लगी. परिजनों द्वारा न दिये जाने पर  धमकी भी देने लगी. उसके बाद ज़ब परिजनों ने जानकारी की तो पता चला कि मनरेगा मे साढ़े तीन वर्ष पहले मृत हुए घर के मुखिया ने अभी मजदूरी कि है जिसका पैसा बैक खाते मे आया है. उसी पैसे को निकालने के लिए रोजगार सेवक बैंक पासबुक मांग रहे है. इस तरह मनरेगा योजना के तहत किये जा रहे भ्रस्टाचार के मामले का खुलासा हो गया कि ग्राम प्रधान, सचिव, व रोजगार सेवक किस तरह मनरेगा योजना मे भ्रस्टाचार कर रहे है. हलाकि इस मामले को लेकर ज़ब हमने मुख्य विकास अधिकारी जयेंन्द्र कुमार से बात की तो उन्होंने बताया कि इस मामले मे डीसी मनरेगा को विधिक कार्यवाही के लिए निर्देशित किया गया है. दोषियों के खिलाफ विधिक कार्यवाही कि जायेगी।

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