लखनऊ की जेल में एक कैदी को पीटने और जेलर व उप जेलर को धमकाने के मामले में कोर्ट का आया बडा फैसला
23 साल पुराने एक मामले में एम पी /एम एल ए अदालत ने पूर्व विधायक व माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को और उसके चार साथियों को बरी किया है ।अदालत ने कहा है कि अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को सिद्ध नहीं किया जा सका और आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।जिसके पश्चात कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है ।आपको बता दें कि इस घटना की शिकायत साल 2000 में लखनऊ के आलमबाग थाने में दर्ज कराई गई थी ।फिलहाल मुख्तार अंसारी अभी बांदा जेल में कैद हैं।
विशेष अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एके श्रीवास्तव ने पाया कि अभियोजन पक्ष मुख्तार अंसारी और उनके चार सहयोगियों लालजी यादव, कल्लू पंडित, यूसुफ चिश्ती और आलम के खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रहा है।इस मामले में अदालत ने लालजी यादव, कल्लू पंडित, यूसुफ चिश्ती और आलम के खिलाफ 17 अगस्त, 2021 को आरोप तय किए थे।जबकि माफिया डॉन अंसारी के खिलाफ 28 मार्च, 2022 को आरोप तय किए गए थे।





