प्रधानमंत्री फसल बीमा के नाम पर इटावा में किसानों को मुआवजे के नाम पर हुआ मजाक ।किसानों को खरीफ़ की फसल बीमा में 5 बीघा बाजरा का बीमा मुआवजा 129 रुपए मिला, तो किसी किसान को मिले 340 या 342 रूपये। किसानों के साथ हुआ मज़ाक।
किसान बीमा के नाम पर मुआवजे के तौर पर किसानों को मिले 340 रुपए
उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद के 6 तहसीलों के अंदर आने वाले आठ विकास खंडों में लगभग 12 हजार से अधिक किसानों का फसल बीमा था।
जिसमें मुख्य तौर पर चकरनगर तहसील क्षेत्र के अंदर चंबल और यमुना नदी में बाढ़ के कारण सैकड़ों किसानों की हजारों बीघा बाजरे एवं अन्य फसलें बर्बाद हो गई थी
जिसमें किसान पूरी तरीके से अन कंगाल और बैंक और साहूकारों का कर्जदार हो चुका था किसानों ने सोचा था कि उन्होंने फसलों का बीमा करवा रखा है तो उन्हें उनकी लागत का पैसा तो मिल ही जाएगा लेकिन प्रशासन के द्वारा बीमा के नाम पर किसानों के साथ इस कदर भद्दा मजाक किया गया कि सभी का पेट भरने वाला अन्नदाता किसान बाड़ मुआवजे की चेक से एक वक्त का नाश्ता भी नहीं कर सकता। किसानों को चकरनगर तहसील क्षेत्र के एक किसान को मुआवजे के नाम पर मात्र ₹129 की चेक दी गई बेमौसम बरसात और बाढ़ से लेकर सूखे तक किसानों को हर साल जूझना पड़ता है इन आपदाओं के कारण किसानों को भारी नुकसान के साथ-साथ आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ता है जिसके लिए सरकार की चलाई जा रही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केकई लाभ बताने के बाद किसान बीमा योजना की पॉलिसी लेता है लेकिन जब किसान के साथ कोई आपदा उसकी फसल को नुकसान पहुंचाती है तो उसका नुकसान भरने की जगह प्रशासन बीमा के नाम पर उनके साथ भद्दा मजाक कर रहा है कई किसान ऐसे हैं जिनको मात्र तीन सौ चार सौ के आसपास मुआवजे की राशि के तौर पर खाते में ट्रांसफर कर दी गई है जहां किसानों का हजारों और लाखों रुपए का नुकसान दैवीय आपदा में हो चुका था।
महिला किसान शीला देवी ने जानकारी देते हुए बताया कि बाजरे में बाली आ चुकी थी हम लोग पूरी तरीके से निश्चित थे और ये सोच रहे थे की इस बार बाजरे की फसल अच्छी हुई है और सारा खर्च निकालने के बाद एक अच्छी खासी बचत भी होगी लेकिन बाढ़ में सब कुछ रह गया, और प्रशासन ने मुझे कोई भी आर्थिक मदद भी नहीं दी जिस कारण हम लोग कर्ज में दब गई हम प्रशासन से यही कहेंगे कि हम किसानों के साथ जो देवी आपदा में हुआ है नुकसान उसकी भरपाई करे।
किसान रमेश चंद्र ने बताया कि उन्होंने अपनी फसल का बीमा कराया था लेकिन जब बाड़ में मेरी पूरी फसल डूब कर नष्ट हो गई, उन्होंने बताया कि लगातार 3 सालों से हम लोगों की बस में बाढ़ से प्रभावित हो रही हैं ओ बीमा के नाम पर पहली बार जब हम लोगों को इस साल हुए नुकसान का पैसा मिला तो उस चेक को देखकर ऐसा लगा कि जैसे हम लोगों के साथ मजाक किया जा रहा हूं मेरे फसल के हुए नुकसान में मुझे मात्र ₹342 की चेक दी गई।
इस तरीके से कर बीमा कंपनी हम लोगों को मुआवजा देती तो हम लोग संतुष्ट नहीं हैं करीब 3 एकड़ भूमि जिसमें फसल उगाने से लेकर और उसे तैयार करने तक हजारों और लाखों रुपए तक खर्चा पहुंच जाता है और ऐसे में हम लोगों को चेक दी गई है जिससे हम लोग एक वक्त का खाना भी नहीं खा सकते। उनका कहना था कि जिस तरीके से हमने अपने किसान का बीमा कराएं और उसका जो भी पैसा बना पूरी प्रीमियम हम लोगों ने जमा की और जब मुआवजे की बात आई तो मुझे ₹342 का चेक थमा रहे यह सरासर धोखा है।
चकरनगर तहसील के गांव डिबौली के रहने वाले किसान होम सिंह ने बताया कि मेरी डेढ़ बीघा फसल थी जो बाढ़ के कारण पूरी तरीके से नष्ट हो गई और हमने अपने खेत पर तैयार हो रही फसल का बीमा भी करवाया था, जिसने मुझे मुआवजे के तौर पर ₹340 का चेक दिया है उन्होंने बताया कि इतनी भूमि पर करीबल मेरा ₹8000 का फसल को तैयार करने में खर्चा आया था और जब बीमा कंपनी ने उस फसल के मुआवजे के तौर पर ₹340 मेरे खाते में डाले है, उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा है कि हम लोगों किसान का जो नुकसान बाढ़ के कारण हुआ है उसका उचित मुआवजा हम लोगों को दिया जाए ना कि मजाक के तौर पर यह तीन सो ₹200 खाते में डाले जाएं। उन्होंने कहा कि मेरे साथी ऐसा बता मजाक नहीं किया गया है बीमा कंपनी ने मेरे ही गांव के करीब 1 दर्जन से अधिक किसानों के खाते में 500 से कम रुपए मुआवजे के तौर पर डालें जो निहायती हम किसानों के साथ एक बड़ा धोखा है।
किसानों को दिए गए मुआवजे को लेकर क्या कहते हैं उप जिलाधिकारी
इटावा में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में किसानों को हुए नुकसान के बाद उनके साथ मुआवजे के तौर पर किए गए मजाक पर जानकारी देते हुए इटावा जनपद की चकरनगर तहसील क्षेत्र के एसडीएम मलखान सिंह ने बताया कि फसल बीमा बीमा कंपनी के द्वारा किया जाता है और इसमें बीमा कंपनी के जो अधिकृत अधिकारी है जो कृषि विभाग से संपर्क रखते हुए क्षेत्र में सर्वे करते हैं और सर्वे करने के उपरांत जिन-जिन किसानों को उस बीमा कंपनी के तहत शामिल करती है और यदि क्षति होती है तो उसका लाभ होने उपलब्ध कराते है,
बीमा कंपनी की जो क्राइटेरिया होते हैं वह राजस्व विभाग से अलग होते हैं वह कृषि विभाग और बीमा कंपनी भी उनके नुकसान का आंकलन कर उनको देने वाले मुआवजे की दर से पैसा देती है यह है वही स्पष्ट कर सकते हैं, राजस्व विभाग का उसने बीमा के संबंध में कोई भी हस्तक्षेप नहीं होता है राजस्व विभाग अलग से ही सहायता देने का प्रावधान है, आसन स्तर से डायरेक्शन दी गई है कि यदि फसल देवी आपदा के कारण बाढ़ के कारण या आग लग जाने के कारण 33 प्रतिशत से अधिक क्षति होती है तो शासन स्तर से जो उसकी दर निर्धारित है तो राज्य से वाग्देवी आपदा मद से उनको मदद करता है।
से विभाग से जो सहायता मिलती है दैवीय आपदा के अंतर्गत उसमें कोई भी यह जरूरी नहीं है कि उन्होंने बीमा करवाया है या नहीं बीमा कंपनी का जो कांसेप्ट है वह अलग है और जो राज्य सभा उत्तर प्रदेश की तरफ से दैवीय आपदा मस्से जो धनराशि दी जाती है वह उसका वितरण करता है।
किसान बीमा के नाम पर जो सरकार ने योजना चला रखी है उनके प्रतिनिधि तहसीलों में आते हैं भ्रमण करते और किसानों से भी संपर्क करते हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी किसान ने अभी उन्हें आकर सूचना नहीं की है कि उन्हें बीमा कंपनी के द्वारा मुआवजे के तौर पर ₹500 से कम की धनराशि दी गई है अगर ऐसी कोई जानकारी सामने आता है तो उसकी संबंधित अधिकारी से वार्ता करके समस्या का निदान किया जाएगा। जो भी किसान मुआवजे को लेकर परेशान है वह अपनी समस्याओं से अवगत कराएं।





