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यूपी के इस जिले में खेली गई जूतामार होली

विदेशों में भी प्रसिद्ध है शाहजहांपुर की जूतामार होली



-यूपी के शाहजहांपुर में होली पर निकाले जाने वाले बड़े और छोटे लाट साहब के जुलूस को लेकर पुलिस और प्रशासन लगभग पूरी तैयारियां कर चुका है।होली के दिन इस जुलूस का इंतजार लोगो को बड़ी बेसब्री से रहता है।होली के दिन जुलूस निकालने की यह प्रथा वर्षों पुरानी है।जिस में लोग बैलगाड़ी पर बैठे लाट साहब को जूते चप्पल मारकर अग्रेजो के प्रति आक्रोश प्रकट करते हैं।इस बेहद ही अनोखे जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए शाहजहांपुर पुलिस फोर्स के अलावा बाहर के जनपदों से भी फोर्स मंगाई जाती है।यही नही लोकल स्तर पर पुलिस होली के दिन आम लोगो को भी स्पेशल पुलिस ऑफिसर बनाती हैं।जिससे माहौल खराब होने से पहले उसको सुल्टा लिया जाए।

दरअसल होली का त्यौहार पूरे देश में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है कहीं फूलों की होली तो कहीं लट्ठमार होली खेली जाती है लेकिन शाहजहांपुर में जूते मार होली खेली जाती है यहां होली के पर्व पर लाॅट साहब का जुलूस निकालने की परम्परा है। शाहजहांपुर में लाॅट साहब के दो जुलूस निकाले जाते हैं। जिसको छोटे और बड़े लाॅट साहब के नाम से जाना जाता है। छोटे लाॅट साहब का जुलूस सरायकाईयां मोहल्ले के अंदर से निकाला जाता है, उस जुलूस को पक्का पुल, दलेलगंज होते हुए, पुत्तूलाल चौराहा तक लाया जाता है, उसके बाद फिर जुलूस वापस सरायकाईयां पुलिस चौकी पर ले जाकर समाप्त कर दिया जाता है। इसी तरह बड़े लाॅट साहब का जुलूस चौक से शुरू होता है। उसके बाद कोतवाली में ले जाया जाता है। जहां कोतवाल उनको सलामी देकर नेग देते हैं। उसके बाद रोशनगंज,बेरी चौकी, अंटा चौराहा होता हुआ थाना सदर बाजार क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद बाबा विश्वनाथ मंदिर में लाट साहब से पूजा अर्चना कराकर जुलूस को वापस शहर कोतवाली ले जाकर उसका समापन किया जाता है। बड़े लाॅट साहब का रूट करीब 8 किलोमीटर का है। दोनों जुलूसों के रूट पर लगभग 67 मस्जिद और मजारों को तिरपाल से ढक दिया जाता है। ताकि जुलूस में चलने वाला कोई भी व्यक्ति धार्मिक स्थल पर रंग फेंककर माहौल को न बिगाड़ दे।



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