मृतक बंदियों के पिता बोले, सुल्तानपुर जिला कारागार में की गई मेरे बच्चों की हत्या, जेल प्रशासन में हड़कंप
अमेठी के दो कैदियों द्वारा जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या करने के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद गुत्थी बहुत उलझ गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण तो हैंगिंग आया लेकिन ये भी दर्शाया गया है कि शव पुराना हो गया था। जिसके बाद जेल प्रशासन कटघरे में आ गया है। प्रकरण सुल्तानपुर जिला कारागार से बरामद दो संदिग्ध डेड बॉडी से जुड़ा हुआ है।
गांव में ही किया गया अंतिम संस्कार
पीएम के बाद शव जब कैदियों के घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। गांव वालों ने तो एकदम किनारा ही कर रखा था। कोई भी ग्रामीण अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुआ। कुछ थोड़े बहुत जो रिश्तेदार पहुंचे तो उन्होंने ही शव को घाट पर पहुंचाया, जहां अंतिम क्रिया की गई। जामो थाने की फोर्स की सुरक्षा में शव का अंतिम संस्कार किया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आते ही मचा हड़कंप
तीन डाक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। पूरे समय वीडियोग्राफी हुई। दोनो मृतक कैदियों की रिपोर्ट आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार करिया उर्फ विजय पासी की तीन दिन पहले ही मौत हो चुकी थी, जबकि मनोज रैदास की मौत दो से तीन दिन के बीच बताई जा रही है। हैरानी इस बात की कि दोनो के शरीर पर चोट के एक नहीं बल्कि कई निशान थे। लेकिन जेल में पहुंचे आलाधिकारी केवल आत्महत्या की ही पुष्टि करते रहे। किसी ने भी चोट की जानकारी नहीं दी। दोनो कैदियों के परिजन पहले ही हत्या को आशंका जता चुके थे। बहरहाल इस मामले में कोई भी बोलने को तैयार नहीं है।
बहन ने लगाए गंभीर आरोप
अमेठी के जामो थाना अंतर्गत लोरिकपुर गांव में मृतक करिया की मां लखपता और बहन कमलेश फूट-फूट कर विलाप कर रही हैं। तीन भाईयों की इकलौती बहन कमलेश कहती है, हमारा भाई हमारे हाथ का पला-बढ़ा था। पैसा लेकर जेल वाले हमारे भाइया को मार डाले। ऐसे नहीं मर जाएगा भाइया, तमाम लोग जेल में रहते हैं। ऐसे जेल में लोग मरने लगे तो जेल काहे के लिए बनी है।
मर गए होंगे बेटा तो लौटकर नहीं आएगा
26 मई को जिस ओमप्रकाश यादव की हत्या हुई थी उनका मकान मृतक कैदियों के घर से दो किमी की दूरी पर है। यहां जब हम पहुंचे तो उनकी मां-दादी व पत्नी बाहर बरामदे में बैठी मिली। उनसे जैसे ही घटना को लेकर सवाल किया गया उनका दर्द उभर आया। मां और पत्नी की आंखों से आंसू बह निकले। मां बोली मर गए होंगे दोनों, लेकिन अब हमारा बेटा तो लौटकर नहीं आएगा। मृतक की तीन बेटियां व एक बेटा है। नवंबर 2020 को बड़ी और अप्रैल 2021 को दूसरी बेटी की शादी किया। वो अभी दो लाख के कर्ज में थे। घर पर मौजूद बेटी रोशनी ने बीए प्रथम की परीक्षा पास की है। दूसरे साल एडमीशन लेना था लेकिन पिता की मौत से लेट हो गया और अब एडमीशन का समय समाप्त हो गया है। बेटा सचिन ओटी ऑपरेटर का गुजरात से कोर्स कर लौटा है लेकिन जॉब नहीं मिल रही। ऐसे में परिवार के आगे वित्तीय संकट है लेकिन कोई प्रशासनिक मदद नहीं दी गई।





