कानपुर में हृदय रोग संस्थान जहां उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से हार्ट के मरीज इलाज के लिए आते हैं। उत्तर प्रदेश के बड़े हृदय रंग रोग संस्थानों में शामिल है । यहां के डॉक्टर नीरज कुमार ने बताया साइकोथेपी इलाज भी दिया जा रहा है। यहां पर दिल के मरीजों को इलाज के साथ-साथ धार्मिक पुस्तकों को पढ़ने के लिए दिया जाता है। ताकि वह जीवन के सर को समझ सकें और चिंता भय से मुक्त रहें।
कार्डियोलॉजी के वरिष्ठ हृदय रोग चिकित्सक डॉ नीरज कुमार ने बताया की अस्पताल में भर्ती होने वाले ऐसे मरीज जिनका ऑपरेशन किया जाना है। या फिर मरीज का ऑपरेशन हो चुका है ,तो ऐसे में उन मरीजों को वार्ड में उनके बेड पर ही मुफ्त में हनुमान चालीसा, सुंदरकांड ,गीता और रामायण कथा की किताब पढ़ने के लिए दी जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है, की दिल के मरीजों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है कि उनका मन और दिमाग दिल स्थिर रहे। इसका एक कारण यह भी है की कुछ मरीज ज्यादा गंभीर होते हैं ,तो कुछ को कम दिक्कतें होती हैं। ऐसे में मरीज एक दूसरे को देखकर भी मन में तरह-तरह के ख्याल आते हैं। इसलिए उन्हें धार्मिक पुस्तक देकर व्यस्त करने और अध्यात्म और धर्म की बातों के जरिए साइकोथेपी की तरह इलाज दिया जाता है।
डॉ नीरज ने बताया कि पिछले साल दिवाली से मरीजों को पुस्तकों का वितरण किया गया था। जिसके परिणाम भी बहुत अच्छे आए हैं। देखा जाता है कि जिन मरीजों को 7 से 10 दिन लगते हैं ।अब उन मरीजों को 4 से 5 दिन में आराम मिल जाता है और उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाता है। बीते 1 साल में 600 से अधिक मरीजों को ऑपरेशन के बाद या पहले पुस्तक पढ़ने के लिए दी गई। इसके साथ ही अस्पताल में ओपीडी वाली जगह पर भी गीता के श्लोक को दीवारों में बड़े-बड़े पंपलेट लगाकर लगाया गया है। मरीज से बात करने पर मरीज ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। मरीज का कहना है कि इसे पढ़ने से उनके मन को शांति मिलती है और होने वाले दर्द से उनका मन हट जाता है ।इसके साथ ही उनके मन से चिंता भी दूर हो जाती है ।





