गन्ने के बढ़े दाम को किसानों ने बताया नाकाफ़ी
उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार को गन्ने का समर्थन मूल्य 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया है। जिसे किसानों के द्वारा ना काफी बताया जा रहा है।
आपको बता दे की पश्चिम उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में स्थित जिला कलेक्ट्रेट पर भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक का गन्ने के दाम बढ़ाने को लेकर पिछले 17 दिनों से अनिश्चितकालीन धरना चला आ रहा है। जिसके चलते सरकार के द्वारा आज बढ़ाए गए गन्ने के दामों को लेकर भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि गन्ना मूल्य वृद्धि के लिए हम सरकार का धन्यवाद करते हैं लेकिन यह वृद्धि किसानों के लिए ना काफी है इस वृद्धि से उत्तर प्रदेश का किसान खुश नहीं है क्यूंकि किसानों को उम्मीद थी कि गन्ने के दामों में उचित वृद्धि होगी और कम से कम ₹400 कुंतल किसानों को गन्ने का दाम मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि हम सरकार से अपील करते हैं कि वह अपने फैसले पर एक बार फिर से पुनःविचार करें।
धर्मेंद्र मलिक की माने तो यह जो बढ़ोतरी है वह किसान संघर्ष का नतीजा है एवं भारतीय किसान यूनियन अराजनेतिक ने जो पूरे प्रदेश में दो बार आंदोलन किया तो इसका संज्ञान लेते हुए कहीं ना कहीं यह गन्ना मूल्य वृद्धि की गई है और इसके लिए हम सरकार का धन्यवाद करते हैं लेकिन यह वृद्धि ना काफ़ी है वही उत्तर प्रदेश के गन्ना किसान इस वृद्धि से खुश नहीं है साथ ही उम्मीद थी कि उचित गन्ना वृद्धि होगी और कम से कम ₹400 कुंतल किसानों को मिलेगा लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया है लेकिन जो भी वृद्धि हुई है उसके लिए सरकार का धन्यवाद है वह सरकार से अपील करते हैं कि सरकार अपने फैसले पर एक बार फिर पुनर्विचार करें और गन्ना किसानों को कम से कम ₹400 कुंटल का मूल्य दिया जाए, आज धरने का 17वा दिन है और आगे का कमेटी निर्णय लेगी क्योंकि गन्ना मूल्य घोषित करने की मांग थी और आज गन्ने का जो मूल्य था वह घोषित हो चुका है तो इस पर अब हमें विचार करना पड़ेगा कि आगे इसको कैसे करना है।





