आगरा की अदालत में फिल्म अभिनेत्री एवं भाजपा सांसद कंगना रनौत के विरुद्ध राष्ट्र द्रोह और राष्ट्र अपमान में मुकदमा दाखिल
17 सितंबर को होंगे वादी अधिवक्ता के बयान
फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा एमएसपी एवं अन्य मांगों को लेकर सन 2020 व 2021 में दिल्ली के बार्डर पर धरने पर बैठे लाखों किसानों के प्रति बेहद अभद्र टिप्पणी के द्वारा उनको हत्यारा और बलात्कारी होने का आरोप लगाने तथा 16 नवंबर 2021में राष्ट्रपिता महात्मागांधी के अहिंसात्मक सिद्धांत का मजाक उड़ाने के आरोप में राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा एडवोकेट ने स्पेशल कोर्ट एमपी एमएलए में कंगना रनौत के विरुद्ध राष्ट्रद्रोह एवं राष्ट्र अपमान में एक वाद दायर किया है। स्पेशल कोर्ट एमपी एमएलए के न्यायाधीश माननीय अनुज कुमार सिंह ने वाद दर्ज करते हुये वादी अधिवक्ता के धारा 200 सीआरपीसी के बयानों के लिए दिनांक 17 सितंबर 2024 की तिथि नियत कर दी है ।
न्यायालय में प्रस्तुत वादपत्र में वादी रमाशंकर शर्मा एडवोकेट ने कहा है कि वह पारिवारिक रूप किसान के बेटे हैं तथा किसान परिवार में पैदा हुए हैं तथा वकालत से पूर्व करीब 30 वर्ष तक कृषि कार्य किया है तथा देश व देश के किसानों के प्रति तथा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रति पूर्ण रूप से श्रद्धा भाव एवं सम्मान रखते है। दिनांक 26 अगस्त 2024 को वादी एवं वादी के अन्य साथी अधिवक्ताओं बी.एस. फौजदार, राम दत्त दिवाकर, राजेंद्र गुप्ता धीरज, आर.एस. मौर्य सहित तमाम साथियों ने देश के टीवी चैनलों पर सुना एवं देखा तथा 27 अगस्त 24 को आगरा के दैनिक समाचार पत्रों में पढ़ा है जिसमें हिमाचल प्रदेश मंडी से भाजपा की सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा किसानों के प्रति बेहद अमर्यादित एवं अपमान जनक टिप्पणी करते हुए कहा है कि अगर किसान आंदोलन के दौरान भाजपा का शीर्ष नेतृत्व मजबूत नहीं होता तो पंजाब में भी बांग्लादेश जैसे हालात पैदा हो जाते।
कंगना रनौत ने सन 2020 एवम 2021 में धरने बैठने वाले देश के लाखो किसानों पर धरने के दौरान हत्याएं एवं दुष्कर्म के गंभीर आरोपों लगाए हैं। वादी अधिवक्ता ने कहा है कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है देश की सारी आबादी किसानों पर ही निर्भर है। किसान दिन रात अथक मेहनत कर अनाज, दालें, सब्जी, फल आदि पैदा करता है जिस पर सारा देश निर्भर है। यही नहीं सन 2020 में केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा किसानों के विरुद्ध काले कानून बनाए थे जिनके विरोध में देश के लाखों किसानों ने अगस्त 2020 से लेकर दिसंबर 2021 तक दिल्ली बॉर्डर पर धरना प्रदर्शन कर एमएसपी एवं अपनी कुछ जायज मांगों के लिए धरना प्रदर्शन किया था तथा 13 महीने तक बरसात,ठंड एवम भीषण गर्मी में किसान अपनी मांगों को लेकर धरना देते रहे। जिसमें करीब 750 किसानों की मृत्यु भी हो गई थी।तब केंद्र सरकार ने सन 2022 में कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए किसानों के विरुद्ध बनाए गए काले कानून को वापस लिया था। अधिवक्ता ने अपने वाद में कहा है कि कंगना रनौत का यह पहला अक्षम्य अपराध नहीं है इससे पहले भी कंगना रनौत ने करीब तीन वर्ष 16 नवंबर 21 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अहिंसात्मक सिद्धांत का मजाक उड़ाते हुए तथा खुलेआम अपमान करते हुए वक्तव्य दिया था कि गाल पर चांटा खाने से भीख मिलती है आजादी नहीं। भारत को असली तो आजादी सन 2014 में मिली है जब केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार सत्ता में आई थी। वहीं कंगना ने यह भी कहा कि 1947 में जो आजादी मिली थी वह महात्मा गांधी के भीख के कटोरे में मिली थी तथा भीख में मिली थी।
वादपत्र में कहा गया है कि इस प्रकार कंगना रनौत द्वारा देश के करोड़ों किसानों एवं स्वयं किसान पुत्र वादी अधिवक्ता तथा राष्ट्रपति महात्मा गांधी के प्रति अमर्यादित टिप्पणी करते हुए संपूर्ण देश वासियों का अपमान कर राष्ट्रद्रोह तथा राष्ट्र अपमान जैसा गंभीर अपराध किया है।वादी ने इस संबंध में 31 अगस्त 24 को पुलिस कमिश्नर आगरा एवं थाना अध्यक्ष न्यू आगरा को शिकायत भेज कर कार्यवाही करने की मांग की थी लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने यह वाद प्रस्तुत किया है। कोर्ट ने बाद को दर्ज करते हुए अधिवक्ता के बयानों के लिए 17 सितंबर 2024 की तिथि नियत कर दी है।





