5100 दीपों की रोशनी से जगमगाया मखौड़ा धाम
मखौड़ा धाम। परशुरामपुर क्षेत्र के पौराणिक स्थल मखौड़ा धाम पर शुक्रवार को महावीर स्वामी मनसा दास के सौजन्य से देव दीपावली के अवसर पर 5100 दीप जलाए गए। कथा स्थल,यज्ञस्थल मनोरमा घाट समेत पश्चिमी मंदिर को भी मिट्टी के दिए से सजाया गया।कार्यक्रम की शुरुआत दशरथ महल अयोध्या के महंत बिंदु गद्याचार्य देवेन्द्रप्रसादाचार्य ने मां मनोरमा की आरती व पूजा करके प्रथम दीप जला कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने बताया कि मखौड़ा धाम वही पौराणिक स्थल है जहां चक्रवर्ती सम्राट महाराजा दशरथ ने पुत्रेष्ठी यज्ञ कराया था। यज्ञ के कुछ दिनों पश्चात उन्हें पुत्र के रूप में भगवान राम,लक्ष्मण, भरत और शत्रुघन की प्राप्ति हुई। तब से लेकर आज तक यहां पर प्रत्येक वर्ष वैशाख के अक्षय तृतीया से जानकी नवमी तक यज्ञ कराने की परंपरा चलती आ रही है। आज भी लोग देश के अनेकों प्रांत से आकर पुत्र प्राप्ति के लिए यहां यज्ञ अनुष्ठान कराते रहते हैं। देव दीपावली का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन सभी देवी-देवता धरती पर आकर गंगा घाट पर दिवाली मनाते हैं। उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म में देव दिपावाली का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरा सुर नाम के एक राक्षस का वध किया था, जिसके बाद सभी देवी-देवताओं ने प्रसन्न होकर भगवान शिव की आराधना के समय संपूर्ण काशी को दीपों से सजा दिया था। तब से ही कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावाली मनाने की शुरुआत हुई। इस दिन को त्रिपुरी पूर्णिमा और त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस मौके पर श्री राम जानकी मंदिर के पुजारी सूर्य नारायण दास वैदिक, छोटू दास, रामायणी राम शरण दास जी महाराज, हनुमानगढ़ी के बलराम दास जी महाराज, परशुरामपुर थाना प्रभारी दिनेश चंद्र चौधरी व साधु संत आदि लोगों उपस्थित रहें।





