35 साल बाद आया मलियाना कांड में कोर्ट का फ़ैसला,39 आरोपी किये गये बरी
एडीजे-6 न्यायाधीश लखविंदर सिंह सूद ने दिया फ़ैसला।
मलियाना कांड में एडीजे-6 कोर्ट का बड़ा फ़ैसला,कोर्ट ने बरी किए 39 आरोपी,40 आरोपी पूर्व में हो चुके है भगोड़े घोषित,तारीखों पर नही आए मलियाना कांड के 40आरोपी,20 आरोपियों की हो चुकी है मौत,कोर्ट में दाख़िल है मृतको की रिपोर्ट,23 गवाहों की भी हो चुकी है मौत, शवो का पोस्टमार्टम करने वाले डॉ.पी.एन. मल्होत्रा की भी हो चुकी है मौत।
तारीखों के दौरान दंगों में मारे गए लोगो के परिजन भी नहीं कर पाए थे आरोपियों की पहचान,बाकी गवाह हो गए होस्टाइल, मलियाना कांड के 39 आरोपी हो गए बरी, 40 भगोड़े आरोपियों पर चेलगा अलग से केस,23 मई 1987 को हुआ था मलियाना कांड,विशेष समुदाय के 72 लोगो की हुई थी मौत।हाशिमपुरा कांड के अगले दिन हुआ था मलियाना में नरसंहार।
नरसंहार के मामले में केंद्र सरकार को करना पड़ा था हस्तक्षेप
राजीव गांधी के नेतृत्व वाली तत्कालीन केंद्र सरकार ने गंग नहर और हिंडन नदी पर हुईं हत्याओं की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे ।सीबीआई ने 28 जून 1987 को अपनी जांच शुरू की और पूरी जांच के बाद अपनी रिपोर्ट भी सौंप दिया था। लेकिन इस रिपोर्ट को कभी भी आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया गया।
उत्तर प्रदेश की अपराध शाखा- केंद्रीय जांच विभाग (सीबी-सीआईडी) ने इस मामले की जांच शुरू की। इसकी रिपोर्ट अक्टूबर 1994 में राज्य सरकार को सौंपी गई और इसने 37 पीएसी कर्मियों पर मुकदमा चलाने की सिफारिश की थी।
अंत में 1996 में गाजियाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत आरोप पत्र दायर किया गया था।आरोपियों के खिलाफ 23 बार जमानती वारंट और 17 बार गैर-जमानती वारंट जारी किए गए। लेकिन उनमें से कोई भी 2000 तक अदालत के समक्ष पेश नहीं हुआ था।
वर्ष 2000 में 16 आरोपी पीएसी जवानों ने गाजियाबाद की अदालत के सामने आत्मसमर्पण किया था और उन्हें जमानत मिल गई और वह फिर से अपनी सेवा पर बहाल हो गए।इस नरसंहार में कुल 72 लोग मारे गए थे और 34 साल से यह मामला कोर्ट में चल रहा था।





