संभल में ASI ने पृथ्वीराज चौहान के किले को देखा, तोता मैना की कब्र और फिरोजपुर के किले का होगा सौंदर्यीकरण
संभल में प्रशासन को दो जगहों पर पृथ्वीराज चौहान की विरासतें मिली हैं। पहली विरासत विशाल बावड़ी है, जहां पृथ्वीराज चौहान अपने सैनिकों के साथ पड़ाव डालते थे। दूसरी विरासत फिरोजपुर गांव में एक किला है, जो खंडहर में तब्दील हो चुका है। इस पर पुरातत्व विभाग का बोर्ड लगा है, लेकिन देखरेख नहीं होने से लुप्तप्राय स्थिति में है। डीएम डॉक्टर राजेंद्र पेंसिया, एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसडीएम वंदना मिश्रा और पुरातत्व विभाग की टीम ने बुधवार शाम 4 बजे बावड़ी, फिरोजपुर किला और क्षेमनाथ मंदिर का ASI ने निरीक्षण किया। लोगों ने बावड़ी के अंदर जाकर, दीवारों को छूकर पूरा निरीक्षण किया। पतले रास्तों से होते हुए सभी लोग बावड़ी के अंदर पहुंचे। टीम ने तोता-मैना की कब्र को भी देखा। डीएम ने सभी प्राचीन इमारत, 68 तीर्थ और 19 कूपों को संरक्षित करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने किसी भी प्राचीन इमारत या धार्मिक स्थल पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं।इधर, लक्ष्मणगंज में रानी सुरेंद्र बाला की बावड़ी का पहला फ्लोर दिखने लगा है। 12 फीट गहरी खुदाई के बाद बावड़ी में सीढ़ी भी दिखी है। माना जा रहा है कि 2 से 3 फ्लोर की ये बावड़ी हो सकती है।
हजरतनगर गढ़ी थाना क्षेत्र में फिरोजपुर गांव है। इसी गांव में सम्राट पृथ्वीराज का किला है। प्रशासनिक अधिकारी सदर कोतवाली संभल क्षेत्र के गांव शहजादी सराय स्थित क्षेमनाथ तीर्थ मंदिर भी पहुंचे। डीएम-एसपी ने ASI की टीम के साथ तीर्थ मंदिर परिसर और जागृत कुएं का निरीक्षण भी किया। ASI टीम ने वीडियो-फोटो लिए हैं। इधर, चंदौसी के लक्ष्मणगंज में प्राचीन बावड़ी की लगातार 5वें दिन भी खुदाई की गई। बावड़ी को नुकसान न हो इसलिए अब जेसीबी से खुदाई रुकवा दी गई है। मजदूर ही काम करेंगे। 5 दिन की खुदाई के बाद सुरेंद्र बाला की बावड़ी का पहला फ्लोर मिल गया है। 12 फीट गहरी खुदाई के बाद बावड़ी में सीढ़ी भी दिखी है। माना जा रहा है कि ये सीढ़ियां नीचे की तरफ यानी पहली से दूसरी मंजिल की ओर ले जाती हैं। माना जा रहा है कि ये बावड़ी 2 से 3 मंजिला गहरी हो सकती है। फिलहाल अब दूसरी मंजिल का रास्ता तलाश कर उसके अंदर जाने का रास्ता भी खोजा जाएगा और फिर खुदाई की जाएगी।ASI की टीम बुधवार सुबह 10:15 बजे चंदौसी के लक्ष्मणगंज पहुंची। दोपहर में 1:08 मिनट पर बावड़ी का सर्वे करके लौट गई। टीम ने मोबाइल और कैमरों की फ्लैश लाइट व टॉर्च जलाकर करीब 4 घंटे तक बावड़ी के अंदर बारीकी से जांच-पड़ताल की। इस दौरान बावड़ी के अंदर मिट्टी के नीचे एक पक्की फर्श सामने आई, जो लाल रंग के पत्थर से बनी हुई थी।
जिलाधिकारी राजेंद्र पैंसिया ने कहा कि तोता-मैना की कब्र भी जीर्णशीर्ण हालत में है, इसे भी सुरक्षित करने की आवश्यकता है. इसके अलावा राजपूत काल की बावड़ी जो पृथ्वीराज चौहान के समय में बनी थी, वह भी बहुत बावड़ी है इसे भी सुरक्षित और संरक्षित करने की जरूरत है. डीएम ने कहा कि इतिहास को आप संजोकर नहीं रखा जाएगा तो इतिहास आपको छोड़ देगा. संभल के इतिहास को संरक्षित करके रखा जाएगा तो पूरा संसार यहां पर्यटन के लिए और घूमने के लिए आएगा. संभल की विलुप्त हो चुकी सभी धरोहर का जीर्णोद्धार किया जाएगा और उन्हें संरक्षित रखा जाएगा. एएसआई की मदद से इन सभी धरोहरों को सुरक्षित रखेंगे. भविष्य में इन धरोहरों के विषय में सभी को बताया भी जाएगा।





